Sexual Health का सच: Masturbation, भ्रम और आधुनिक जीवन की छुपी हुई सच्चाई
प्रस्तावना एक साधारण सवाल, लेकिन गहरी समस्या “डॉक्टर साहब, मैंने Google पर पढ़ा कि masturbation safe है… तो मैं रोज करने लगा… क्या यह सही है?” यह एक साधारण सवाल लगता है, लेकिन इसके पीछे एक बहुत गहरी समस्या छुपी हुई है। आज के समय में जानकारी की कमी नहीं है, लेकिन सही समझ की कमी ज़रूर है । इंटरनेट ने हमें जवाब दिए हैं, लेकिन स्पष्टता नहीं दी। और इसी भ्रम ने sexual health को एक प्राकृतिक प्रक्रिया से हटाकर एक performance आधारित गतिविधि बना दिया है। जब दो extremes सच बन जाते हैं आज समाज में masturbation को लेकर दो तरह की सोच एक साथ चल रही है। एक तरफ लोग इसे पूरी तरह सामान्य मानकर रोज़ की आदत बना चुके हैं — जैसे यह कोई सामान्य routine हो। दूसरी तरफ कुछ लोगों में इतना डर बैठा दिया गया है कि उन्हें लगता है कि वीर्य का नाश ही जीवन का नाश है। इन दोनों के बीच एक चीज़ common है — संतुलन (balance) की कमी। वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो हमारा शरीर किसी भी चीज़ के extreme के लिए नहीं बना है। चाहे वह खाने में हो, सोच में हो या stimulation में — हर अति धीरे-धीरे शरीर और मन को असंतुलन की ओर ले जात...